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राजा मयूरध्वज व् सुराणा समाज से तालुक रखता है मोरखाना गांव

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ओसवाल समाज के सुराणा कुल की कुलदेवी सुसवाणी माता

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बीकानेर जिले के नोखा तहसील में स्थित है मोरखाना गांव । जो बीकानेर की विश्व प्रसिद्ध शक्ति पीठ करणी माता मंदिर देशनोक से 21 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में आया हुवा हैं। गांव एवं आसपास के क्षेत्र में प्रचलित मान्यताओं के अनुसार इस गांव का प्राचीन नाम मोर खियाणा था और यह पुराणों में वर्णित राजा मयूरध्वज की राजधानी थी। गांव में स्थित एक प्राचीन वृक्ष के बारे में यह मान्यता है की यह वही वृक्ष है जिससे गिरकर उस मोर की मृत्यु हुई थी और फिर भगवान शिव के आशीर्वाद से वह मनुष्य के रूप में पुनर्जीवित हुवा था। गाँव में एक पुराना शिव मंदिर भी स्तिथ है जिसके बारे में मान्यता है कि यहाँ भगवन शिव ने कभी तपस्या की थी। ओसवाल समाज के सुराणा कुल की कुलदेवी सुसवाणी माता का मंदिर भी यहाँ स्तिथ है जहाँ प्रदेश भर से इस कुल के लोग दर्शन करने पहुँचते हैं। इन माता जी की प्रचलित कथा के अनुसार ये जब 13 वर्ष की थी तब नागौर के मुसलमान शासक ने इनसे विवाह करना चाहा । वे वहाँ से भाग आयी और यहाँ आकर भगवान् शिव के मंदिर में शरण ली, प्राथना की । कहते हैं भगवान  इनकी प्राथना पर प्रकट हुए और अपना त्रिशूल फैंक कर कहा कि जहाँ यह गिरे वही तेरा आश्रय स्थल हैं। त्रिशूल एक कैर के झाड़ के बीच गिरा।सुसवाणी माता उसी कैर में समां गयीं। आज वहाँ उनका विशाल बना हुवा हैं जिसमे वह कैर का झाड़ भी स्थित हैं।

नवरात्रि में इस मंदिर बड़ा मेला लगता है। शिवरात्रि में भी बड़ा मेला भरता है। सुसवाणी माता मंदिर ट्रस्ट और गांव वासियों के सहयोग से यहाँ कई धर्म शालाएं बनी हुई हैं जहाँ वर्ष पर्यन्त यात्री आकर रुकते हैं जिनकी निशुल्क व्यवस्था की जाती है। गांव के चारो ओर प्रवेश द्वार बने हुए हैं। गांव में 400 बीघा ओरण भूमि है एवं ट्रस्ट के सहयोग से ग्रामवासी एक गोशाला भी चलाते है। वर्तमान में यह गांव अर्जुनोत भाटियों का है लेकिन गाँव के इतिहास के अनुसार 12वीं व् 13वीं शताब्दी में यहाँ साँखला राजपूतों का शासन था। कालान्तर में भाटियों ने यहाँ अधिकार कर लिया था। वर्तमान में 400 परिवार अर्जनोत भाटियों के हैं। इसके अलावा 10 परिवार खींया भाटियों के , 5 परिवार नारणोत भाटियों के , 150 परिवार मेघवालों के , 100 परिवार नायकों के , 10 सेवग, 5 हरिजन , 1 साध, 2 नाइ , 5 लोहार एवं 1 ढोली का परिवार गांव में निवास करते है। 

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Comments

Gajendra singh

जब अर्जन जी मोरखाना (मोरखियाणा) में आये थे तो वहां सांकलों का डेरा था बड़े बुजर्गो से सुना है ओर राव जी के अनुसार ये तत्थ गलत है सा जैसे पेसो से पोस्ट हुई है

अर्जनोत मोरखाना

जब अर्जन जी मोरखाना (मोरखियाणा) में आये थे तो वहां सांकलों का डेरा था बड़े बुजर्गो से सुना है ओर राव जी के अनुसार वहा अर्जुन जी की रात बासा ओर कुवे का पानी ओर सुसवाणी माता का सपने में अर्जुन जी को वर देना की मेरी पूजा यहां कोई नही करता तब अर्जुन जी ने जोत जलाकर पूजा आरम्भ की थी और वर भी दिया था कि आप यही रुके ओर मेरी पुजा करे और सांखला के ऊपर आप के एक 100 के बराबर होगा तब से अर्जुन जी ने सांकलों को भगाकर मोरखाना में रहे थे और सांखला को मार भगाया था तब से मोरखाना के अर्जनोत भटियो की वर देवी मानते है ओर अर्जुन जी ओर मोरखाना की बहुत सी जानकारी है सा with तम्बरपत्री सा

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